Mumbai: भारतीय संगीत जगत के लिए 12 अप्रैल 2026 का दिन बेहद दुखद रहा। महान पार्श्वगायिका आशा भोसले का आज मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया। उन्हें एक दिन पहले कार्डियक अरेस्ट के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी पोती ज़नाई भोसले ने बताया कि वे काफी समय से सीने में संक्रमण और अत्यधिक थकान से जूझ रही थीं। उनका अंतिम संस्कार कल शाम शिवाजी पार्क में होगा, जहाँ फिल्म जगत के दिग्गज और लाखों चाहने वाले उन्हें अंतिम विदाई देने पहुँचेंगे।
🎵 10 साल की उम्र से शुरू हुआ संगीत का सफर
आशा भोसले ने मात्र 10 साल की उम्र में मराठी फिल्म ‘माझा बाळ’ से अपने करियर की शुरुआत की थी। हिंदी सिनेमा में उनका पहला कदम फिल्म ‘चुनरिया’ के गाने ‘सावन आया’ से हुआ और ‘रात की रानी’ उनका पहला हिंदी सोलो गाना रहा।
सात दशकों से भी लंबे करियर में उन्होंने हज़ारों गाने गाए। ‘उमराव जान’, ‘तीसरी मंज़िल’ और ‘रंगीला’ जैसी फिल्मों में उनके गाने आज भी लोगों के दिलों में ज़िंदा हैं। हाल ही में दुबई के एक कॉन्सर्ट में उन्होंने विकी कौशल की फिल्म ‘Bad Newz’ का गाना ‘तौबा तौबा’ पर थिरकते हुए सबका दिल जीत लिया था — वह वीडियो खूब वायरल हुआ था।
🏅 कैलाश खेर ने Padma Shri किया आशा जी को समर्पित
मशहूर गायक कैलाश खेर ने आशा भोसले को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए सभी से उनकी विरासत का जश्न मनाने की अपील की। उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा —
“जिस तरह हम किसी के आने का जश्न मनाते हैं, उसी तरह उनके जाने का भी जश्न मनाना चाहिए — खासकर उनका, जिन्होंने अपनी ज़िंदगी को इतना सार्थक और उद्देश्यपूर्ण बनाया।”
कैलाश खेर ने अपना पद्म श्री पुरस्कार आशा भोसले को समर्पित करते हुए कहा — “नौ साल पहले राष्ट्रपति ने मुझे पद्म श्री दिया था। मैं यह सम्मान उन महान लोगों को अर्पित करता हूँ जिन्होंने हम जैसे लोगों को प्रेरित किया और आगे भी करते रहेंगे।”
🎬 ‘उमराव जान’ के निर्देशक मुज़फ्फर अली ने किया याद — “वो किरदार के लिए गाती नहीं थीं, खुद को उसमें समर्पित कर देती थीं”
फिल्म ‘उमराव जान’ के निर्देशक मुज़फ्फर अली ने आशा भोसले के साथ अपने अनुभव को याद करते हुए कहा —
“चिलमन के उस तरफ… आशा जी सिर्फ एक राष्ट्रीय क्षति नहीं हैं। मेरे लिए यह एक ऐसी खामोशी है जो बहुत करीब से गूँजती है। आशा भोसले कभी सिर्फ एक आवाज़ नहीं थीं — वो एक उपस्थिति थीं, जो किसी पल में दाखिल होती थीं और उसे अमर कर देती थीं।”
उन्होंने बताया कि जब उन्होंने आशा जी से ‘उमराव जान’ के लिए संपर्क किया, तो उन्होंने तुरंत समझ लिया कि यह महज़ एक रिकॉर्डिंग नहीं बल्कि एक बड़ी ज़िम्मेदारी है।
“उन्होंने लखनऊ को एक ऐसी स्थायित्व दी जो सिनेमा ने बहुत पहले उससे छीन ली थी। वो किरदार के लिए नहीं गाती थीं — वो उसमें समर्पित हो जाती थीं। ऐसी सच्चाई व्यावसायिक हिंदी सिनेमा में बहुत कम देखने को मिलती है।”
मुज़फ्फर अली ने यह भी बताया कि अपनी एक और फिल्म ‘ज़ूनी’ के लिए भी उन्होंने आशा जी से 5 गाने गवाए। इसके अलावा Gramco के लिए बनी फिल्म ‘दामन’ में भी 5 गाने रिकॉर्ड हुए, जो अब तक अनसुने हैं — जैसे कि समय को लिखे गए बंद लिफाफे।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा —
“आशा जी अब रुपहले पर्दे की रोशनी में शायद न आएं। लेकिन वो इंसानी दिल से कभी नहीं गई हैं। वहीं उनकी असली महफिल है। कुछ आवाज़ें खामोश नहीं होतीं — वो बस भीतर से सुनाई देने लगती हैं।”
📌 आशा भोसले — एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| निधन की तारीख | 12 अप्रैल 2026 |
| निधन स्थान | ब्रीच कैंडी अस्पताल, मुंबई |
| अंतिम संस्कार | शिवाजी पार्क, मुंबई (कल शाम) |
| करियर की शुरुआत | मराठी फिल्म ‘माझा बाळ’ (10 साल की उम्र में) |
| करियर की अवधि | 7 दशकों से अधिक |
| यादगार फिल्में | उमराव जान, तीसरी मंज़िल, रंगीला |
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