Nangal Dam News: भाखड़ा नहर प्रणाली की जीवनरेखा माने जाने वाले नांगल बांध झील की भंडारण क्षमता भारी मात्रा में गाद (सिल्ट) जमा होने के कारण लगभग 24 प्रतिशत घट गई है। इससे उत्तर भारत में पानी की आपूर्ति और जलविद्युत उत्पादन पर गंभीर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
📌 मुख्य बातें
- नांगल बांध की भंडारण क्षमता 25.22 MCM से घटकर सिर्फ 19 MCM रह गई है।
- यह जानकारी संसद में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के सवाल के जवाब में दी।
- नांगल बांध से पंजाब, हरियाणा और दिल्ली को पानी की आपूर्ति होती है।
- बांध से गंगुवाल और नक्कियां के दो पावरहाउस को पानी मिलता है, जो मिलकर करीब 100 MW बिजली पैदा करते हैं।
- बांध को वन्यजीव अभयारण्य और वेटलैंड घोषित किया गया है, जिससे डिसिल्टिंग के लिए पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति ज़रूरी होगी।
📉 कितनी घटी क्षमता?
संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार नांगल बांध झील की भंडारण क्षमता अपने निर्धारित स्तर 25.22 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) से घटकर महज 19 MCM रह गई है। यानी 6 MCM से अधिक की कमी आई है — जो एक बड़े जलाशय के लिए बेहद चिंताजनक है।
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| मूल भंडारण क्षमता | 25.22 MCM |
| वर्तमान भंडारण क्षमता | 19 MCM |
| कमी | 6+ MCM (लगभग 24%) |
| हाइड्रोपावर उत्पादन | लगभग 100 MW |
💧 पानी और बिजली सप्लाई पर असर
नांगल बांध झील से नांगल हाइडल चैनल को पानी मिलता है, जो आगे भाखड़ा मेन लाइन बनकर पंजाब, हरियाणा और दिल्ली तक पहुंचती है। अधिकारियों के अनुसार घटती क्षमता के कारण भविष्य में — खासकर गर्मियों के चरम मांग के दौरान — नहर प्रणाली में पानी का बहाव प्रभावित हो सकता है।
इसके अलावा आनंदपुर साहिब हाइडल चैनल भी इसी जलाशय से निकलती है, जो गंगुवाल और नक्कियां के दो पावरहाउस को पानी देती है। ये दोनों मिलकर पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के लिए लगभग 100 MW बिजली उत्पन्न करते हैं।
🌿 डिसिल्टिंग में क्यों है अड़चन?
भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) ने इस समस्या को गंभीरता से लिया है और जलाशय में डिसिल्टिंग (गाद हटाने) का प्रस्ताव विचाराधीन है। लेकिन यह काम इतना आसान नहीं है।
दरअसल, नांगल बांध झील को केंद्र सरकार ने वन्यजीव अभयारण्य और वेटलैंड घोषित किया हुआ है। साथ ही आसपास के 100 मीटर के दायरे को इको-सेंसिटिव ज़ोन बनाया गया है। इसलिए कोई भी डिसिल्टिंग गतिविधि शुरू करने से पहले केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अनुमति लेनी होगी — जो एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है।
⚠️ विशेषज्ञों की चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर गाद जमा होती रही तो न सिर्फ पानी का बहाव प्रभावित होगा, बल्कि डाउनस्ट्रीम बिजली संयंत्रों के टरबाइन की कार्यक्षमता भी घटेगी। इससे बिजली उत्पादन में भारी कमी आ सकती है — खासकर मांग के चरम समय में।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा —
“विडंबना यह है कि बांधों में करोड़ों क्यूबिक मीटर रेत गाद के रूप में जमा है, लेकिन हम उसका उपयोग नहीं कर रहे। दूसरी तरफ नदियों का अत्यधिक खनन हो रहा है जिससे पारिस्थितिक असंतुलन पैदा हो रहा है।”
🇮🇳 राष्ट्रीय चुनौती बनती जा रही है यह समस्या
नांगल की यह स्थिति केवल एक बांध की समस्या नहीं है। देशभर के कई जलाशयों में गाद जमा होने के कारण भंडारण क्षमता घट रही है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो देश की जल सुरक्षा, सिंचाई व्यवस्था और बिजली उत्पादन सभी खतरे में पड़ सकते हैं।
BBMB अब एक ऐसे संतुलित समाधान की तलाश में है जो पर्यावरणीय नियमों का पालन भी करे और बुनियादी ढांचे की ज़रूरतों को भी पूरा करे।
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