ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने शुक्रवार को साफ कहा कि अमेरिका के साथ होने वाली शांति वार्ता तब तक शुरू नहीं होगी जब तक इज़राइल लेबनान पर हमले बंद नहीं करता और अमेरिका ईरान की जमी हुई संपत्ति (फ्रोज़न एसेट्स) रिलीज़ नहीं करता।
📌 मुख्य बातें
- उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि पाकिस्तान में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता “सकारात्मक” रहेगी।
- ईरानी संसद स्पीकर गालिबाफ ने बातचीत से पहले दो शर्तें रखीं — लेबनान में सीजफायर और ईरान की फ्रोज़न एसेट्स की वापसी।
- दो हफ्ते का युद्धविराम नाज़ुक दौर में है क्योंकि ईरान अभी भी होर्मुज़ जलडमरूमध्य से ज़्यादातर जहाज़ों की आवाजाही रोके हुए है।
🗣️ गालिबाफ की शर्तें
गालिबाफ ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा —
“बातचीत शुरू होने से पहले दो शर्तें पूरी होनी ज़रूरी हैं — लेबनान में सीजफायर और ईरान की जमा संपत्ति की वापसी।”
यह बयान तब आया जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा, जहाँ ईरान के साथ बातचीत होनी है। इस दल में स्पेशल एनवॉय स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद व सलाहकार जेरेड कुशनर भी शामिल हैं।
🇺🇸 वेंस की चेतावनी
वेंस ने मीडिया से कहा कि उन्हें उम्मीद है बातचीत “सकारात्मक” रहेगी, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी —
“अगर ईरान हमें बेवकूफ बनाने की कोशिश करेगा, तो हमारी टीम उसके लिए तैयार नहीं है।”
🛢️ होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर तनाव
मंगलवार को दो हफ्ते के युद्धविराम की घोषणा हुई थी, जिसकी शर्त थी कि ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलेगा। यह दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है — युद्ध से पहले दुनिया का 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुज़रता था। लेकिन सीजफायर के बाद भी ईरान ने इस रास्ते से ज़्यादातर जहाज़ों की आवाजाही रोकी हुई है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को Truth Social पर नाराज़गी जताते हुए लिखा —
“रिपोर्टें आ रही हैं कि ईरान होर्मुज़ से गुज़रने वाले टैंकरों से फीस वसूल रहा है — यह बंद होना चाहिए और अभी बंद होना चाहिए!”
एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा — “यह हमारा समझौता नहीं था!”
📋 पृष्ठभूमि
यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था। अभी दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम चल रहा है, लेकिन होर्मुज़ विवाद और ईरान की शर्तों के चलते यह नाज़ुक दौर से गुज़र रहा है।



